सावन के पावन महीने में देश-विदेश से आए लाखों शिवभक्त बिहार के सुल्तानगंज से कांवड़ में गंगाजल भरकर 105 किलोमीटर की पदयात्रा कर झारखंड के देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करने पहुंचते हैं, लेकिन 60 वर्षीय एक महिला पिछले 35 वर्षों से सावन में प्रत्येक रविवार को सुल्तानगंज से पदयात्रा कर सोमवार को शिव के दरबार में पहुंचती हैं। बिहार की मुजफ्फरपुर की रहने वाली कृष्णा रानी जो एक शिक्षिका हैं, अब मां कृष्णा बम बन गई हैं। उन्हें देखने और उनसे आर्शीवाद लेने के लिए रास्ते में हजारों लोग पंक्तिबद्ध खड़े रहते हैं। सावन के प्रत्येक सोमवार को कृष्णा डाक बम के रूप में देवघर पहुंचती हैं और बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करती हैं।
डाक बम उन्हें कहा जाता है जो गंगाजल भरकर लगातार चलते हुए 24 घंटे के अंदर बाबा दरबार पहुंचते हैं। यह संकल्प सुल्तानगंज में ही जल भरते समय लिया जाता है। डाक बम कृष्णा सावन के प्रत्येक रविवार को दोपहर ढ़ाई से तीन बजे के बीच सुल्तानगंज की उत्तरवाहिनी गंगा से जल उठाती हैं और देवघर तक का सफर 12 से 14 घंटे में पूरा कर बाबा के दरबार में पहुंच जाती हैं। इस दौरान पूरा रास्ता बोल बम और कृष्णा बम के नारे से गुंजायमान होता रहता है।
इस क्रम में बाबा के भक्त कृष्णा बम के दर्शन के लिए लालायित रहते हैं. सुल्तानगंज, तारापुर, रामपुर नहर, कटोरिया और सुइया पहाड़ क्षेत्र में कृष्णा बम को देखने के लिए भक्तों की लंबी कतार लगी रहती है. रास्ते में सुरक्षा के लिए पुलिस की व्यवस्था भी रहती है। कृष्णा बम लगातार 35 वर्षों से हर सावन में देवघर आ रही हैं। वैशाली के प्रतापगढ़ में जन्मी कृष्णा रानी इस समय मुजफ्फरपुर के एक विद्यालय में शिक्षिका हैं। विवाह के बाद उनके पति नंदकिशोर पांडेय कालाजार से पीडि़त हो गए थे। दिनोंदिन उनकी हालत खराब होती जा रही थी। तब उन्होंने संकल्प लिया कि पति के ठीक होने पर वह कांवड़ लेकर हर साल सावन में बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करेंगी। बाबा बैद्यनाथ ने उनकी प्रार्थना सुन ली।
माँ कृष्णा बम साइकिल से 1900 किलोमीटर तक की वैष्णो देवी की यात्रा भी कर चुकी हैं। इसके अलावा हरिद्वार से बाबाधाम, गंगोत्री से रामेश्वरम और कामरूप कामख्या की भी यात्रा साइकिल से कर चुकी हैं। वह कहती हैं, अगर भगवान के प्रति समर्पण की भावना हो तो खुद भक्त में शक्ति आ जाती है। इसके लिए कुछ करने की आवश्यकता नहीं होती। मैं खुद को भगवान शिव के हवाले कर चुकी हूं और आज जो भी कर रही हूं, वह भगवान की कृपा से कर पा रही हूँ। उन्हें उनके पति और पूरे परिवार का सहयोग मिलता है।












