बाबा बैद्यनाथ धाम से 42 कि.मी. दूर स्थित बाबा बासुकीनाथ धाम शिवभक्तों के हृदय में एक विशेष स्थान रखता है। यह स्थान झारखंड राज्य के दुमका जिले में स्थित है। बाबा नगरी बैद्यनाथ धाम आए हुए शिवभक्त इस स्थान पर जाना कभी नही भूलते। ऐसी मान्यता है कि बाबा बैद्यनाथ के जलाभिषेक के उपरांत बाबा बासुकीनाथ को जलार्पण न करने से उनकी पूजा अधूरी रह जाती है। इसीलिए सुल्तानगंज के उत्तरवाहिनी गंगा घाट से काँवरियागण दो पात्रों में गंगा जल लेकर आते है। पहले पात्र के जल को बाबा बैद्यनाथ पर अर्पित किया जाता है तथा दूसरे पात्र के जल को बाबा बासुकीनाथ पर अर्पित किया जाता है। काँवरियागण बैद्यनाथ धाम से बासुकीनाथ धाम की दूरी पैदल अथवा वाहन के माध्यम से तय करते हैं। बाबा बासुकीनाथ के बारे में मान्यता है कि इनके दरबार मे फौजदारी मुकदमे की सुनवाई होती है तथा बाबा अपने भक्तों की मनोकामनाएं शीघ्र ही पूर्ण करते हैं।
◆ बाबा बासुकीनाथ की पौराणिक कथा ◆
प्राचीन समय मे बासुकी नामक एक किसान भगवान शिव के अनन्य भक्त थे। उस समय इस स्थान पर विनाशकारी अकाल पड़ गया। बासुकी सहित गाँव के समस्त निवासी त्राहिमाम करने लगे। सूखे तथा अकाल के कारण लोग मरने लगे। इस विनाशकारी समय मे भी बासुकी हार नही माने तथा जल की तलाश में जमीन को खोदने लगे। जमीन खोदने के क्रम में उनका फावड़ा अंदर किसी वस्तु से जा टकराया। जब उन्होंने मिट्टी हटाई तो उन्होंने देखा कि एक शिवलिंग के ऊपर रक्त का स्त्राव हो रहा था तथा उनका फावड़ा रक्तरंजित हो चुका था। वे अत्यंत भयभीत हो गए। तब शिवजी प्रकट हुए, उन्होंने बासुकी के इक्षा-शक्ति की प्रशंसा करते हुए उन्हें कहा कि इस शिवलिंग को इसी स्थान पर स्थापित कर दो। आज से ये धाम तुम्हारे नाम से जाना जाएगा। उसी दिन से ये धाम बाबा बासुकीनाथ धाम से जाना जाता है। यहाँ स्थित शिवलिंग का रूप " नागेश " का है। बाबा बासुकीनाथ पर दूध से जलाभिषेक करने का एक विशेष महत्व है।
● बाबा बासुकीनाथ समस्त प्राणियों का कल्याण करें। ●


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